डिलीवरी के बाद क्या खाएं – दूध बढ़ाने और पेट कम करने के उपाय
By Teddyy Editorial Team | Last Updated: July 19, 2026
डिलीवरी के बाद माँ का दूध बढ़ाने वाले 12 बेस्ट फूड्स हैं: मेथी के बीज, शतावरी, बादाम, ओट्स, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, दूध व डेयरी, दाल व लीन प्रोटीन, पपीता, गाजर-शकरकंद, अखरोट व अलसी, साबुत अनाज और तिल के लड्डू व खजूर। ये प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम व हेल्दी फैट से भरपूर हैं जो रिकवरी तेज़ करते और दूध की आपूर्ति बढ़ाते हैं। नीचे 12 फूड्स की सूची और पूरा डाइट चार्ट दिया गया है।
| फूड | फायदा |
|---|---|
| मेथी के बीज | गैलेक्टागॉग — दूध उत्पादन बढ़ाते हैं; रात भर भिगोकर सुबह लें |
| शतावरी | प्रमुख गैलेक्टागॉग जो दूध की आपूर्ति बढ़ाता है |
| बादाम | प्रोटीन, कैल्शियम व हेल्दी फैट का अच्छा स्रोत |
| ओट्स (जई) | घुलनशील फाइबर से भरपूर, दूध उत्पादन को बढ़ावा देते हैं |
| हरी पत्तेदार सब्जियाँ | आयरन, कैल्शियम व विटामिन A-C से भरपूर |
| दूध व डेयरी (दही, पनीर) | कैल्शियम का प्रमुख स्रोत, हड्डियों के लिए ज़रूरी |
| दाल व लीन प्रोटीन | शरीर की मरम्मत व मांसपेशियों को मज़बूत बनाते हैं |
| पपीता | पाचन सुधारता है व कब्ज से राहत देता है |
| गाजर व शकरकंद | बीटा-कैरोटीन, स्तनपान कराने वाली माँओं के लिए फायदेमंद |
| अखरोट व अलसी | ओमेगा-3 फैटी एसिड, बच्चे के मस्तिष्क विकास में मददगार |
| साबुत अनाज (ब्राउन राइस, क्विनोआ) | जटिल कार्ब्स, दिनभर ऊर्जा देते हैं |
| तिल के लड्डू व खजूर | ताकत देते हैं व आयरन की कमी पूरी करते हैं |
नई माँ बनने के बाद सही आहार लेना बेहद ज़रूरी है क्योंकि इससे शरीर की रिकवरी तेज़ होती है और स्तनपान के लिए पर्याप्त दूध का उत्पादन होता है।
डिलीवरी के बाद क्या खाना चाहिए — यह हर नई माँ का सबसे बड़ा सवाल होता है। इसका सही जवाब आपकी रिकवरी और दूध की आपूर्ति दोनों पर निर्भर करता है। इस गाइड में हम विस्तार से बताएंगे कि कौन से खाद्य पदार्थ आपके शरीर को जल्दी ठीक करेंगे और बच्चे को पर्याप्त पोषण देंगे।
डॉक्टर और पोषण विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि प्रसव के बाद प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ सबसे महत्वपूर्ण हैं। दाल, दूध, हरी सब्जियाँ, ड्राई फ्रूट्स और घी जैसे पोषक तत्वों से भरपूर भोजन माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।
Medically reviewed by Dr Kriti Sharma (Obstetrician | Reproductive Medicine, Gynecologic Surgery)
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मातृत्व भावनाओं का एक रोलरकोस्टर है, बिल्कुल ‘कभी खुशी कभी गम’ की तरह। लेकिन इन सबके बीच, डिलीवरी के बाद का भोजन इसका जरूरी हिस्सा है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि अपने शरीर को पोषण देने, डिलीवरी के बाद पेट कम करना आसान बनाने और दूध बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए?
इस ब्लॉग में आप जानेंगी कि प्रसव के बाद आपको क्या खाना चाहिए और किन चीज़ों से परहेज़ करना चाहिए।

डिलीवरी के बाद क्या खाना चाहिए
फल और सब्जियाँ
सीज़नल फल जैसे पपीता, केला और सेब विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होते हैं जो शरीर की रिकवरी में मदद करते हैं। पत्तेदार सब्जियाँ जैसे पालक और मेथी आयरन का उत्कृष्ट स्रोत हैं। गाजर और शकरकंद में बीटा-कैरोटीन होता है जो स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए फायदेमंद है। इन्हें रोज़ाना अपने भोजन में शामिल करें।
साबुत अनाज
ब्राउन राइस, क्विनोआ, ओट्स और होल व्हीट जैसे साबुत अनाज जटिल कार्बोहाइड्रेट का बेहतरीन स्रोत हैं। ये धीरे-धीरे ऊर्जा प्रदान करते हैं, जिससे नई माँ को दिनभर थकान कम महसूस होती है। साबुत अनाज में फाइबर भी होता है जो पाचन को बेहतर बनाता है।
लीन प्रोटीन
चिकन, मछली, दाल, सेम और टोफू जैसे प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ शरीर की मरम्मत और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं। प्रसव के बाद शरीर को अतिरिक्त प्रोटीन की आवश्यकता होती है, इसलिए हर भोजन में प्रोटीन का एक स्रोत ज़रूर शामिल करें।
हेल्दी फैट
एवोकैडो, नट्स, बीज और जैतून का तेल स्वस्थ वसा के बेहतरीन स्रोत हैं। ये बच्चे के मस्तिष्क विकास और माँ के हार्मोन संतुलन के लिए आवश्यक हैं। विशेष रूप से ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थ जैसे अखरोट और अलसी के बीज लाभदायक होते हैं।
डेयरी उत्पाद
दूध, दही और पनीर कैल्शियम के प्रमुख स्रोत हैं जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। स्तनपान के दौरान माँ के शरीर से कैल्शियम की अधिक मात्रा खर्च होती है, इसलिए डेयरी उत्पादों का नियमित सेवन ज़रूरी है।
डिलीवरी के बाद क्या नहीं खाना चाहिए
प्रोसेस्ड फूड्स
पैकेट वाले चिप्स, इंस्टेंट नूडल्स और रेडी-टू-ईट भोजन में अनहेल्दी फैट्स, अत्यधिक सोडियम और एडेड शुगर होती है। ये न केवल माँ के वज़न बढ़ने का कारण बनते हैं, बल्कि स्तन के दूध की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकते हैं। इनकी जगह घर का बना ताज़ा भोजन चुनें।
मसालेदार भोजन
प्रसव के बाद पाचन तंत्र विशेष रूप से संवेदनशील होता है। तीखे मसालों वाला भोजन एसिडिटी, गैस और पेट में जलन पैदा कर सकता है। शुरुआती कुछ हफ्तों में हल्का और सुपाच्य भोजन लेना बेहतर रहता है।
गैस पैदा करने वाले खाद्य पदार्थ
सेम, पत्तागोभी, ब्रोकोली और फूलगोभी जैसी सब्जियाँ गैस और सूजन का कारण बन सकती हैं। माँ के आहार से गैस बच्चे के पेट में भी तकलीफ पैदा कर सकती है, इसलिए इन्हें सीमित मात्रा में खाएं।
कैफीन और शराब
अधिक कैफीन से शरीर में पानी की कमी हो सकती है और नींद प्रभावित होती है। वहीं अल्कोहल स्तन के दूध में शामिल हो सकता है और शिशु के विकास को नुकसान पहुँचा सकता है। चाय-कॉफी की मात्रा सीमित रखें और शराब से पूरी तरह परहेज़ करें।
दूध बढ़ाने के घरेलू नुस्खे: सुपर फूड्स
- मेथी के बीज: डिलीवरी के बाद का भोजन के रूप में इन्हें रात भर भिगोकर रखें और सुबह सेवन करें।
- शतावरी पाउडर: इसे “गैलेक्टागॉग” के रूप में जाना जाता है जो दूध उत्पादन को बढ़ाता है। इसे गाय के दूध में मिलाकर या कैप्सूल के रूप में लिया जा सकता है।
- बादाम: प्रोटीन, कैल्शियम और स्वस्थ वसा का एक अच्छा स्रोत है। यह नाश्ते के रूप में या विभिन्न व्यंजनों में जोड़ने के लिए उपयुक्त है।
- ओट्स (जई): घुलनशील फाइबर से भरपूर ओट्स दूध उत्पादन को बढ़ावा देते हैं। इन्हें दलिया के रूप में खाया जा सकता है या स्मूदी में मिलाया जा सकता है।
- हरी पत्तेदार सब्जियाँ: आयरन, कैल्शियम और विटामिन ए और सी से भरपूर, इन्हें सलाद, सूप या स्टर-फ्राई के रूप में लिया जा सकता है।

मां का दूध बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए
यह आहार चार्ट उन माताओं के लिए बनाया गया है जो स्तनपान के दौरान दूध की आपूर्ति बढ़ाना चाहती हैं। यह संतुलित और पौष्टिक भोजन का सुझाव देता है।
| समय | भोजन / पेय |
| सुबह (6:00 – 7:00 बजे) | – गुनगुना पानी (1 गिलास) |
| – मेथी के बीज भिगोकर पानी या 1-2 चम्मच मेथी | |
| नाश्ता (8:00 – 9:00 बजे) | – दलिया या ओट्स (दूध और सूखे मेवे के साथ) |
| – फूलगोभी या मेथी परांठा (दही के साथ) | |
| – फल (पपीता, केला, सेब) | |
| – बादाम वाला दूध या गाय का दूध (1 कप) | |
| मध्य सुबह (11:00 बजे) | – ड्राई फ्रूट्स (बादाम, अखरोट, खजूर) |
| – नारियल पानी या छाछ | |
| दोपहर का भोजन (1:00 – 2:00 बजे) | – मूंग दाल या हरी सब्जी (जैसे मेथी, पालक, लौकी) |
| – रोटी या ब्राउन राइस | |
| – दही (1 कटोरी) | |
| – गुड़ और घी के साथ भोजन | |
| शाम का नाश्ता (4:00 – 5:00 बजे) | – फ्रूट चाट या अंकुरित चना/मूंग |
| – ग्रीन टी या जीरा पानी (1 कप) | |
| रात का भोजन (8:00 – 9:00 बजे) | – खिचड़ी (दाल और सब्जी डालकर) या रोटी और दाल |
| – लौकी की सब्जी या अन्य हल्की सब्जी | |
| – सोने से पहले 1 गिलास गाय का दूध | |
| अतिरिक्त सुझाव | – दिनभर में 2-3 लीटर पानी पिएं। |
| – जीरा, सौंफ और अजवाइन का पानी पिएं। | |
| – तिल के लड्डू और खजूर खाएं। | |
| – तनाव से बचें और पर्याप्त नींद लें। |
इस आहार चार्ट के साथ स्वस्थ दिनचर्या अपनाएं और किसी भी असुविधा पर डॉक्टर से सलाह लें।
निष्कर्ष
डिलीवरी के बाद देखभाल के दौर में यह याद रखें कि भोजन आपका मित्र है। डिलीवरी के बाद का भोजन वो ईंधन है जो आपको चलाता है, बच्चे का ख्याल रखने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा देता है, और जो डिलीवरी के बाद पेट कम करना आसान बनाता है। इसलिए अपने खान-पान का विशेष ख्याल रखें और अपने आपको बार-बार डाइपर बदलने जैसे एक्शन के लिए तैयार रखें।
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डिलीवरी के बाद किन फलों का सेवन करें
फल नई माँ के लिए विटामिन, फाइबर और प्राकृतिक शर्करा का आसान स्रोत हैं। पपीता पाचन को सुधारता है और कब्ज से राहत देता है, जो डिलीवरी के बाद आम समस्या है। केला तुरंत ऊर्जा देता है और इसमें पोटैशियम होता है जो थकान कम करता है। सेब रोज़ खाने से आयरन की कमी पूरी होती है। अनार से खून बनता है और यह स्तनपान कराने वाली माँओं के लिए विशेष रूप से लाभदायक है। संतरे और आंवला विटामिन सी देते हैं जो आयरन के अवशोषण में मदद करता है। खजूर पाँच से छह नग रोज़ खाने से ताकत मिलती है। ध्यान रखें कि फल हमेशा ताज़े और मौसमी ही चुनें।
दिनभर का संतुलित आहार चार्ट
डिलीवरी के बाद एक संतुलित दैनिक रूटीन कुछ ऐसा हो सकता है। सुबह उठते ही गुनगुना पानी मेथी और अजवाइन के साथ पिएं। नाश्ते में दलिया, उपमा या मूंग दाल चीला दही और एक फल के साथ लें। सुबह दस बजे एक गिलास दूध और चार-पांच भीगे बादाम। दोपहर के खाने में दो रोटी, दाल, हरी सब्जी, सलाद और दही शामिल करें। शाम चार बजे हर्बल चाय या जीरा पानी के साथ भुने चने या सूखे मेवे। रात के खाने में हल्की खिचड़ी या दाल-चावल के साथ लौकी या तुरई की सब्जी। सोने से पहले एक गिलास हल्दी वाला दूध। दिनभर में कम से कम दस से बारह गिलास पानी पीना ज़रूरी है।
पेट कम करने के लिए घरेलू उपाय
डिलीवरी के बाद पेट धीरे-धीरे कम होता है, इसमें छह से नौ महीने लग सकते हैं। कुछ घरेलू उपाय इस सफर को आसान बनाते हैं। रोज़ सुबह गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर पिएं, यह पाचन सुधारता है। जीरा, सौंफ और अजवाइन का पानी दिनभर पीने से सूजन कम होती है। मेथी के बीज रात भर भिगोकर सुबह खाली पेट चबाने से वज़न नियंत्रित होता है। बेली बैंडिंग छह सप्ताह बाद पाँच से छह घंटे रोज़ करें। डॉक्टर की सलाह के बाद हल्की सैर शुरू करें, धीरे-धीरे तीस मिनट तक बढ़ाएँ। तले-भुने और मीठे खाने से बचें, चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल करें।
क्या नहीं खाना चाहिए
कुछ खाद्य पदार्थ डिलीवरी के बाद रिकवरी को धीमा कर सकते हैं या स्तनपान करने वाले शिशु को परेशान कर सकते हैं। मसालेदार और तेल वाला खाना पहले छह सप्ताह तक न खाएँ। ठंडे पेय, बर्फ वाला पानी और कोल्ड ड्रिंक से परहेज़ करें क्योंकि ये पाचन कमज़ोर करते हैं। फूलगोभी, पत्तागोभी, राजमा और चना पहले महीने में सीमित मात्रा में लें क्योंकि ये गैस बनाते हैं। चाय और कॉफी दिन में एक कप से ज़्यादा न लें, कैफीन शिशु तक पहुँच सकता है। शराब और तम्बाकू पूरी तरह से बंद रखें। बहुत ठंडा या बहुत गर्म खाना पाचन को परेशान कर सकता है, हमेशा कमरे के तापमान पर खाएँ।
डॉक्टर से कब सलाह लें
कुछ स्थितियों में स्व-देखभाल से ज़्यादा डॉक्टर की मदद चाहिए। यदि आपको लगातार थकान महसूस होती है और भरपूर नींद के बाद भी ऊर्जा नहीं मिलती, यदि वज़न तेज़ी से बढ़ या घट रहा है, यदि बाल बहुत ज़्यादा गिर रहे हैं, यदि पेट दर्द छह सप्ताह बाद भी कम नहीं हुआ है, या यदि स्तन में दर्द, गांठ या बुखार महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। थायरॉइड, आयरन और विटामिन डी की जाँच कराना ज़रूरी हो सकता है। पोषण विशेषज्ञ या डायटीशियन से व्यक्तिगत डाइट प्लान बनवाना भी मददगार है, खासकर यदि आपको पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या रही हो।
संदर्भ और स्रोत
- World Health Organization (WHO). Infant and Young Child Feeding. who.int
- ICMR-National Institute of Nutrition (NIN). Dietary Guidelines for Indians (2024). nin.res.in
- American Academy of Pediatrics (AAP). Breastfeeding and the Use of Human Milk. aap.org
- National Library of Medicine. Nutritional Requirements in Pregnancy and Lactation. pubmed.ncbi.nlm.nih.gov
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
डिलीवरी के बाद कौन-सी सब्जी खाना चाहिए?
डिलीवरी के बाद आवश्यक पोषक तत्वों के लिए पत्तेदार सब्जियाँ, गाजर, शकरकंद, कद्दू और लौकी का विकल्प चुनें।
डिलीवरी के बाद कितने दिन तक गर्म पानी पीना चाहिए?
डिलीवरी के बाद कितने दिन तक गर्म पानी पीना चाहिए? यह सवाल बहुत सी महिलाओं के मन में होता है| डिलीवरी के बाद पहले 24 घंटों में, सामान्यत: चिकित्सा विशेषज्ञ गरम पानी की छोटी मात्रा में सिप करने की सिफारिश करते हैं। इससे डिलीवरी के बाद शारीरिक तनाव के बाद भी डिहाइड्रेशन से बचा जा सकता है और शरीर को हाइड्रेट किया जा सकता है। शरीर की सफाई और उपचार में सहायता के लिए डिलीवरी के बाद कम-से-कम 40 दिनों तक गर्म पानी पीने की सलाह दी जाती है। यह समयानुसारी है ताकि शरीर बच्चेदानी की उत्तेजना की शारीरिक तनाव से बहाल हो सके। गरम पानी यदि माता स्तनपान कर रही है तो लैक्टेशन को बढ़ावा देने में भी मदद कर सकता है।
डिलीवरी के बाद अजवाइन खाने से क्या होता है?
अजवाइन अपने मूत्रवर्धक गुणों के कारण सूजन को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि यह दूध उत्पादन को भी कम कर सकता है, इसलिए उपयोग सीमित मात्रा में करें।
डिलीवरी के बाद चावल खा सकते हैं क्या?
हाँ, डिलीवरी के बाद चावल खाना सुरक्षित है। पोषण संबंधी लाभों के कारण ब्राउन राइस बेहतर विकल्प है।
डिलीवरी के बाद घी खाना चाहिए या नहीं?
हाँ, लेकिन घी का उपयोग सीमित मात्रा में करें, क्योंकि संभावित लाभों के बावजूद यह कैलोरी से भरपूर है।
डिलीवरी के बाद रोटी खाना चाहिए या नहीं?
रोटी ऊर्जा का एक अच्छा स्रोत है। बेहतर पोषण के लिए साबुत गेहूं (होल व्हीट) का विकल्प चुनें।
डिलीवरी के बाद कौन से फल खाने चाहिए?
डिलीवरी के बाद पोषण के लिए केले, सेब, संतरे, खरबूजे और जामुन जैसे फल अच्छे माने जाते हैं।
डिलीवरी के कितने दिन बाद पेट कम होता है?
डिलीवरी के बाद पेट कम होने में आमतौर पर 6 से 8 सप्ताह का समय लग सकता है, लेकिन यह हर महिला के शरीर पर निर्भर करता है। गर्भावस्था के दौरान बढ़ा हुआ गर्भाशय डिलीवरी के बाद धीरे-धीरे अपनी सामान्य स्थिति में लौटता है, जिसे यूटेरस इनवॉल्यूशन कहते हैं।
संतुलित आहार, हल्का व्यायाम (जैसे वॉकिंग या योग) और पर्याप्त नींद पेट को कम करने में मदद करती है। हालांकि, यदि सिजेरियन डिलीवरी हुई हो, तो व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। धैर्य और नियमित देखभाल से शरीर धीरे-धीरे सामान्य आकार में लौट आता है।




