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प्रेगनेंसी में बुखार क्यों आता है: कारण, लक्षण और इलाज

| Last Updated: April 9, 2026

प्रेगनेंसी में बुखार — गर्भवती महिला थर्मामीटर से तापमान जांचती हुई
WHO-GMP CertifiedTrusted by 5M+ Families25+ Years ExpertiseFact Checked

 

प्रेगनेंसी में बुखार आना एक चिंता का विषय हो सकता है, लेकिन सही जानकारी से आप इसे समझ और संभाल सकती हैं।

 

गर्भावस्था का समय बदलाव का समय होता है। इस दौरान एक स्त्री के भीतर कई शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक परिवर्तन होते हैं। मान लीजिए, एक गर्भवती महिला दिनभर की थकान के बाद आराम कर रही है। अचानक शरीर भारी लगने लगता है, माथा गर्म महसूस होता है और हल्की कंपकंपी होने लगती है। थर्मामीटर से तापमान जांचा जाता है — बुखार है। मन में चिंता उठती है — क्या यह प्रेगनेंसी में सामान्य है? क्या बच्चे को कोई नुकसान तो नहीं होगा? क्या तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए? ऐसे में हल्का बुखार भी कई बार चिंता का विषय बन जाता है। कई महिलाएं यह सोचती हैं कि क्या गर्भावस्था में बुखार आता है, और अगर आता है, तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है। इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानेंगे कि प्रेगनेंसी में बुखार क्यों आता है, इसके लक्षण क्या होते हैं, बुखार आने पर क्या करें और किन घरेलू उपायों से राहत मिल सकती है।

Key Takeaways

About This TopicThis article is reviewed by baby care specialists at Teddyy Diapers, backed by Nobel Hygiene Pvt Ltd with over 20 years of expertise in infant hygiene products certified by WHO and GMP standards.
  • हल्का बुखार (99°F तक) गर्भावस्था में सामान्य हो सकता है, लेकिन 100.4°F से ऊपर तुरंत डॉक्टर से मिलें।
  • पहली तिमाही में तेज़ बुखार से भ्रूण में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट का खतरा बढ़ सकता है।
  • पैरासिटामोल (डॉक्टर की सलाह से) सुरक्षित मानी जाती है; इबुप्रोफेन और एस्पिरिन से बचें।
  • बुखार के साथ पेट दर्द, रक्तस्राव, या पानी जैसा स्राव हो तो तुरंत इमरजेंसी जाएं।
  • मूत्र मार्ग का संक्रमण (UTI): गर्भावस्था में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन बहुत आम है। अगर बुखार के साथ पेशाब में जलन या दर्द हो, तो UTI की जांच ज़रूरी है।
  • लिस्टेरियोसिस (खाद्य जनित संक्रमण): कच्चा मांस, अनपैस्चराइज्ड दूध, या अधूरे फलों-सब्जियों से यह संक्रमण हो सकता है, जो बुखार के साथ मांसपेशियों में दर्द का कारण बनता है।
  • कोरिओएम्निओनाइटिस: यह गर्भाशय की झिल्ली का संक्रमण है जो तेज़ बुखार, पेट दर्द और बदबूदार स्राव का कारण बन सकता है। इसमें तुरंत चिकित्सा ज़रूरी होती है।
  • निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन): पर्याप्त पानी न पीने से शरीर का तापमान बढ़ सकता है। गर्भावस्था में शरीर को अधिक पानी की ज़रूरत होती है, इसलिए दिन में 8-10 गिलास पानी पीएं।
  • दवाई की प्रतिक्रिया: कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट के रूप में हल्का बुखार आ सकता है। कोई भी नई दवाई शुरू करने से पहले डॉक्टर को अपनी गर्भावस्था के बारे में ज़रूर बताएं।

प्रेगनेंसी में बुखार के सामान्य कारण

क्या गर्भावस्था में बुखार आता है? जब आप प्रेगनेंट होती हैं, तो आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है ताकि आपके बच्चे को नुकसान न पहुँचे। इसी कारण संक्रमण की समस्या बढ़ जाती है। आइए जानते हैं बुखार के कुछ कारण:

1. वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण — अगर आपको बैक्टीरियल या वायरल इंफेक्शन, जैसे सर्दी-खांसी, फ्लू या यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) है, तो बुखार आ सकता है।

2. गर्भावस्था से संबंधित संक्रमण — जैसे टॉक्सोप्लाज़्मोसिस, साइटोमेगालोवायरस (CMV) आदि।

3. मौसम में होने वाले बदलाव — अगर आप सोच रही हैं कि क्या गर्भावस्था में बुखार आता है, तो हां, कई बार मौसम में बदलाव के कारण भी तेज़ बुखार की समस्या हो सकती है।

प्रेगनेंसी में बुखार क्यों आता है? — ऊपर बताए गए कारणों की वजह से आपको बुखार हो सकता है, इसलिए बेहतर है कि आप बुखार का घरेलू उपचार न करें और समय रहते डॉक्टर से संपर्क करें।

यह भी पढ़ें: प्रेगनेंसी में गैस बनने पर क्या खाएं: स्वस्थ आहार और घरेलू उपाय

क्या बुखार प्रेगनेंसी के लिए खतरनाक हो सकता है

जैसा कि अब आप जान गए हैं कि प्रेगनेंसी में बुखार क्यों आता है, तो अब इससे जुड़े खतरों को भी जान लेना ज़रूरी है। कई बार लोग सोचते हैं कि प्रेगनेंसी का बुखार कहीं रिस्की तो नहीं, और क्या बुखार प्रेगनेंसी के लिए ख़तरनाक हो सकता है?

अगर आपका बुखार हल्का (लगभग 99°F तक) है, तो घबराने की कोई बात नहीं। लेकिन अगर शरीर का तापमान लगातार 100.4°F या उससे अधिक बना रहता है, तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

खासकर गर्भावस्था की पहली तिमाही में अधिक बुखार से भ्रूण में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट जैसी समस्या का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए गर्भावस्था में बुखार होने पर क्या करें — यह जानना और सही समय पर डॉक्टर से संपर्क करना बेहद ज़रूरी है।

गर्भावस्था में बुखार के लक्षण और पहचान

गर्भावस्था में बुखार के लक्षण सामान्य बुखार जैसे ही होते हैं, लेकिन इन्हें गर्भावस्था की सामान्य थकान और बेचैनी से अलग पहचानना ज़रूरी है:

  1. शरीर में दर्द और थकान: गर्भावस्था में शरीर में हल्का दर्द सामान्य है, लेकिन अगर यह अचानक बढ़ जाए और हड्डियों-जोड़ों में भी दर्द महसूस हो, तो यह बुखार का संकेत हो सकता है। सामान्य गर्भकालीन थकान धीरे-धीरे आती है, जबकि बुखार की थकान अचानक और तीव्र होती है।
  2. कंपकंपी और ठंड लगना: अगर कमरे का तापमान सामान्य है फिर भी आपको ठंड लग रही है या कंपकंपी हो रही है, तो थर्मामीटर से तापमान ज़रूर जांचें। यह बुखार का स्पष्ट संकेत है।
  3. सिरदर्द: गर्भावस्था में हल्का सिरदर्द हार्मोनल बदलावों से हो सकता है, लेकिन बुखार के साथ आने वाला सिरदर्द तेज़ और लगातार होता है। अगर सिरदर्द के साथ धुंधला दिखना या आंखों में दर्द हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
  4. आंखों में जलन और लालिमा: बुखार के कारण शरीर में पानी की कमी होने से आंखों में जलन और सूखापन हो सकता है।
  5. तेज़ सांस या हृदय गति बढ़ना: गर्भावस्था में हृदय गति सामान्य से 10-20 बीट प्रति मिनट अधिक होती है। लेकिन अगर आराम करते समय भी दिल तेज़ धड़क रहा हो या सांस फूल रही हो, तो बुखार या संक्रमण की जांच कराएं।
  6. भूख न लगना और उल्टी: बुखार के कारण भूख कम लगना स्वाभाविक है, लेकिन गर्भावस्था में पोषण बहुत ज़रूरी है। अगर 24 घंटे से अधिक खाना न खा पा रहीं हों, तो डॉक्टर को बताएं।

तुरंत इमरजेंसी जाएं अगर: बुखार 100.4°F से ऊपर हो, पेट में तेज़ दर्द या ऐंठन हो, योनि से रक्तस्राव या पानी जैसा स्राव हो, या बच्चे की हलचल कम महसूस हो।

गर्भावस्था में बुखार का इलाज: क्या करें और क्या न करें

गर्भावस्था में बुखार आने पर सही कदम उठाना बेहद ज़रूरी है। यहां तापमान के अनुसार कार्रवाई की स्पष्ट योजना दी गई है:

तापमान के अनुसार क्या करें

  • 99°F तक (हल्का बुखार): आराम करें, खूब पानी पिएं, हल्के कपड़े पहनें। गुनगुने पानी की पट्टी माथे पर रखें। दवाई ज़रूरी नहीं, लेकिन तापमान पर नज़र रखें।
  • 99°F-100.4°F: डॉक्टर को फ़ोन पर सूचित करें। पैरासिटामोल (एसिटामिनोफेन) 500mg डॉक्टर की सलाह से ले सकती हैं। तरल पदार्थ बढ़ाएं — नारियल पानी, ORS, छाछ।
  • 100.4°F से ऊपर: तुरंत डॉक्टर से मिलें या अस्पताल जाएं। खुद से कोई दवाई न लें। यह इमरजेंसी की स्थिति है।

सुरक्षित दवाई (केवल डॉक्टर की सलाह से)

पैरासिटामोल (एसिटामिनोफेन) गर्भावस्था में बुखार कम करने के लिए आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती है। हालांकि, बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवाई न लें।

किन दवाइयों से बचें

  • इबुप्रोफेन (Brufen): तीसरी तिमाही में विशेष रूप से खतरनाक — भ्रूण की रक्तवाहिकाओं को प्रभावित कर सकती है।
  • एस्पिरिन: रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती है, डॉक्टर की विशेष सलाह बिना न लें।
  • अनजानी हर्बल दवाइयां: कई जड़ी-बूटियों (जैसे अधिक मात्रा में अदरक, एलोवेरा जूस) के गर्भाशय पर प्रभाव हो सकता है।

घरेलू उपाय (हल्के बुखार के लिए)

  • गुनगुने पानी से स्पंज बाथ करें (ठंडा पानी न इस्तेमाल करें)
  • दिन में 10-12 गिलास पानी और तरल पदार्थ लें
  • हल्का और पौष्टिक खाना खाएं — खिचड़ी, दलिया, सूप
  • पर्याप्त आराम करें और भारी काम से बचें

बुखार से बचने के लिए गर्भावस्था में क्या सावधानियां बरतें

गर्भावस्था में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इसलिए बुखार से बचाव के लिए ये सावधानियां अपनाएं:

  1. हाथ बार-बार धोएं: खाना बनाने, खाने, और बाहर से आने के बाद 20 सेकंड तक साबुन से हाथ धोएं। यह संक्रमण से बचाव का सबसे आसान तरीका है।
  2. भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचें: खासकर फ्लू और वायरल सीज़न में मॉल, भीड़ वाले बाज़ार और बंद कमरों में जाने से बचें।
  3. फ्लू का टीका लगवाएं: गर्भावस्था में इन्फ्लुएंज़ा वैक्सीन सुरक्षित और अनुशंसित है। अपने डॉक्टर से टीकाकरण के बारे में बात करें।
  4. खाने की सुरक्षा का ध्यान रखें: कच्चा या अधपका मांस, अनपैस्चराइज़्ड दूध, कच्चे अंडे, और बिना धुली सब्ज़ियों से बचें — ये लिस्टेरियोसिस और टोक्सोप्लाज़्मोसिस का कारण बन सकते हैं।
  5. पर्याप्त पानी पिएं: दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं। निर्जलीकरण शरीर का तापमान बढ़ा सकता है।
  6. पौष्टिक आहार लें: प्रोटीन, विटामिन C, ज़िंक और आयरन युक्त आहार रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करता है। मौसमी फल, हरी सब्ज़ियां, दालें और दही शामिल करें।
  7. बीमार लोगों से दूरी रखें: अगर घर में किसी को सर्दी-खांसी या बुखार है, तो उनसे सुरक्षित दूरी बनाकर रखें और उनके बर्तन अलग रखें।
  8. नियमित प्रसवपूर्व जांच कराएं: डॉक्टर के पास नियमित विज़िट से किसी भी संक्रमण या समस्या का जल्दी पता चल सकता है।
  9. पर्याप्त नींद और आराम: रोज़ 7-8 घंटे की नींद लें। थकान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम करती है।

निष्कर्ष

गर्भावस्था में बुखार को हल्के में लेना उचित नहीं है। हल्का बुखार (99°F तक) आमतौर पर चिंता का विषय नहीं होता, लेकिन 100.4°F या उससे अधिक तापमान पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। सही समय पर जांच, पर्याप्त आराम और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाई लेना मां और शिशु दोनों की सुरक्षा के लिए सबसे ज़रूरी कदम है। किसी भी घरेलू नुस्खे पर भरोसा करने से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

References & Sources

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Written by Teddyy Editorial Team
Maternal and Baby Care Content Specialist at Teddyy Diapers | Backed by Nobel Hygiene Pvt Ltd (WHO & GMP Certified) with 25+ years of expertise in infant care and hygiene products. Our content is reviewed by parenting specialists.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गर्भवती महिला को अगर बुखार आ जाए तो क्या करना चाहिए?

सबसे पहले अपने शरीर का तापमान जांचें। यदि बुखार हल्का है, तो डॉक्टर से संपर्क करें और उनके निर्देश का पालन करें। घर पर तुलसी की चाय, गुनगुने पानी से स्पंज करना या आराम करना प्रेगनेंसी में बुखार का घरेलू उपचार हो सकता है।

क्या प्रेगनेंसी में बुखार आना नॉर्मल है?

हल्का बुखार कभी-कभी सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर बुखार लंबे समय तक बना रहे या तेज हो, तो यह खतरनाक हो सकता है और तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान कितना बुखार खतरनाक होता है?

यदि शरीर का तापमान 100.4°F या उससे अधिक हो जाए और लंबे समय तक बना रहे, तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सलाह लें।

प्रेगनेंसी में ठंड लगकर बुखार आने का क्या कारण है?

गर्भावस्था में शरीर संवेदनशील होता है, और ठंड लगना अकसर वायरल संक्रमण का संकेत हो सकता है। यह प्रेगनेंसी में बुखार क्यों आता है का एक कारण हो सकता है।