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प्रेगनेंसी में खट्टा खाने का मन क्यों करता है: कारण और समाधान

| Last Updated: April 3, 2026

प्रेगनेंसी में खट्टा खाने की क्रेविंग — आम अचार नींबू इमली
WHO-GMP CertifiedTrusted by 5M+ Families25+ Years ExpertiseFact Checked

सीमा को प्रेगनेंसी के दौरान खाने-पीने की पसंद में काफी बदलाव महसूस हो रहे थे। उसे अचानक से इमली, नींबू, करोंदा जैसी खट्टी चीजें खाने का बहुत मन करने लगा। यह दरअसल प्रेगनेंसी में होने वाली ‘sour food craving’ है, जो कई गर्भवती महिलाओं में आम तौर पर देखी जाती है। इसके साथ ही, कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान ‘food aversion’ भी हो सकता है, जिसमें वे उन चीजों को पसंद नहीं करतीं जो पहले उन्हें अच्छी लगती थीं।

जब सीमा को पता चला कि वह माँ बनने वाली है, तो वह बहुत खुश हुई। परिवार में भी खुशी का माहौल था। कुछ ही हफ्तों में सीमा को महसूस हुआ कि उसके खाने-पीने की पसंद बदलने लगी है। अब उसे हर वक्त कुछ खट्टा खाने का मन करता — कभी इमली, कभी नींबू, तो कभी करौंदे।

एक दिन जब वह खट्टी इमली खा रही थी, उसकी माँ मुस्कुराते हुए बोलीं, “अब तो पक्का बेटा होगा, खट्टा खाने का मन जो कर रहा है!”

सीमा को यह सुनकर हंसी आ गई। उसने सोचा — क्या वाकई ऐसा कुछ होता है? अगर आपके मन में भी कभी ऐसे सवाल आएं कि प्रेगनेंसी में खट्टा खाने का मन क्यों करता है या प्रेगनेंसी में तीखा खाने से क्या होता है, तो चलिए, आज हम इसका भी राज़ जान लेते हैं!

प्रेगनेंसी में खट्टा खाने की इच्छा का विज्ञान

About This TopicThis article is reviewed by baby care specialists at Teddyy Diapers, backed by Nobel Hygiene Pvt Ltd with over 20 years of expertise in infant hygiene products certified by WHO and GMP standards.

सीमा की तरह, लगभग हर प्रेग्नेंट महिला का यह सवाल होता है कि प्रेगनेंसी में खट्टा खाने का मन कब करता है? दरअसल, गर्भावस्था के दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव बहुत तेज़ होते हैं, खासतौर पर पहली तिमाही में। इस दौरान एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन न सिर्फ मूड पर असर डालते हैं, बल्कि खाने-पीने की पसंद को भी बदल देते हैं। यही वजह है कि प्रेगनेंसी में खट्टा खाने का मन कब करता है? इसका जवाब है — जब शरीर में विटामिन C या आयरन की कमी हो, या जब मतली और उल्टी की समस्या परेशान करे। खट्टा खाने से मतली में भी राहत मिलती है, इसलिए महिलाएं इस दौरान खट्टी चीज़ें ज़्यादा पसंद करने लगती हैं।

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क्या खट्टा खाने से प्रेगनेंसी पर कोई असर पड़ता है?

हां, खट्टा खाने के अपने फायदे और नुकसान दोनों हैं। सीमित मात्रा में खाने से न केवल मितली में राहत मिलती है, बल्कि पाचन तंत्र भी बेहतर बना रहता है। वहीं, ज़्यादा खट्टा खाने से दांतों में सेंसिटिविटी, पेट में जलन और एसिडिटी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसके अलावा, अत्यधिक खट्टा खाने से ‘acid reflux’ भी हो सकता है, जिससे असहजता महसूस हो सकती है। तो अगर आप भी ये सोच रही हैं कि pregnancy me imli kha sakte hai — तो जी हां, बिल्कुल खा सकती हैं। क्योंकि इससे शरीर को विटामिन C भी मिलता है। बस ध्यान रखें, इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करें, ताकि फायदा भी हो और कोई परेशानी भी न हो।

प्रेगनेंसी में खट्टा खाने के फायदे और नुकसान

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प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को अक्सर खट्टा खाने का मन क्यों करता है, यह सवाल हर किसी के मन में आता है। गर्भावस्था में खट्टा खाने की क्रेविंग होना एक आम बात है, लेकिन इसके पीछे कई कारण और इसके अपने फायदे और नुकसान भी हैं। खट्टे खाद्य पदार्थों के सेवन से कुछ पोषक तत्वों का अवशोषण (nutrient absorption) बेहतर होता है, जो मां और बच्चे दोनों के लिए जरूरी है। आइए जानते हैं कि प्रेगनेंसी में खट्टा खाने के क्या लाभ और क्या हानियां हो सकती हैं।

खट्टा खाने की आदत के पीछे के मनोवैज्ञानिक कारण

प्रेगनेंसी में खट्टा खाने का मन कब करता है — इसका कारण सिर्फ़ शारीरिक ही नहीं, मानसिक भी होता है। प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले हार्मोनल और भावनात्मक बदलावों के बीच खट्टा खाने से महिलाओं को राहत और अच्छा महसूस होता है। कई बार ऐसा भी होता है कि महिलाएं बचपन की किसी याद या किसी खास पारिवारिक अनुभव से जुड़ी चीज़ें खाने के लिए आकर्षित होती हैं। जैसे किसी महिला को अपनी मां के हाथ का नींबू का अचार बहुत पसंद था, और गर्भावस्था में वही स्वाद उसे मानसिक सुकून देता है। यही वजह है कि प्रेगनेंसी में खट्टा खाने का मन कब करता है, इसका जवाब सिर्फ़ पोषण नहीं, भावनात्मक संतुलन से भी जुड़ा हुआ है।

प्रेगनेंसी में स्वास्थ्यवर्धक खान-पान

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं, जिनका असर सीधे-सीधे खाने की इच्छा और पसंद पर भी पड़ता है। इस दौरान अक्सर खट्टा खाने का मन करता है, जो एकदम सामान्य है। लेकिन, यह भी जरूरी है कि आप अपने खान-पान का खास ध्यान रखें, ताकि आपके और आपके बच्चे के स्वास्थ्य को पूरा पोषण मिल सके।

गर्भावस्था के दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव बहुत तेज़ होते हैं, जिससे खाने की क्रेविंग, खासकर खट्टा खाने की इच्छा, बढ़ जाती है। कई बार शरीर में विटामिन C, आयरन या कैल्शियम की कमी भी खट्टा खाने का मन क्यों करता है, इसका कारण बन सकती है। ऐसे में नींबू, आंवला, संतरा जैसे खट्टे फल आपके लिए बेहतरीन विकल्प हैं, क्योंकि इनमें विटामिन C भरपूर मात्रा में होता है, जो इम्युनिटी बढ़ाने और पाचन में मदद करता है।

इसके अलावा, दही, लस्सी और घर का बना अचार भी प्रेगनेंसी में खाने के लिए अच्छे विकल्प हैं। ये न सिर्फ स्वाद बढ़ाते हैं, बल्कि शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी देते हैं। ध्यान रखें कि खट्टा खाने की क्रेविंग को संतुलित मात्रा में ही पूरा करें, ताकि पेट में जलन या एसिडिटी जैसी समस्या न हो।

इस दौरान अपने आहार में ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त चीजें जरूर शामिल करें। इससे शरीर को सभी जरूरी विटामिन और मिनरल्स मिलते हैं, जो गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के लिए बेहद जरूरी हैं। साथ ही, किसी भी तरह की खाने की इच्छा या क्रेविंग को लेकर अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें, ताकि आप और आपका बच्चा दोनों स्वस्थ रहें।

याद रखें, प्रेगनेंसी में खट्टा खाने का मन होना आम बात है, लेकिन स्वास्थ्यवर्धक खान-पान और संतुलित आहार ही इस सफर को आसान और सुरक्षित बनाते हैं।

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क्या आप भी यह सोचकर परेशान हैं कि pregnancy me imli kha sakte hai या नहीं? तो हां, आप बिल्कुल खा सकती हैं — बस ध्यान रखें कि इमली नैचुरल और केमिकल रहित हो। साथ ही, अगर खट्टा खाने का मन ज़्यादा करे तो नींबू पानी में थोड़ा नमक और चीनी डालकर पीना भी बहुत सुकून देगा। इसके अलावा आंवला का ताज़ा मुरब्बा और घर का बना अचार भी न सिर्फ स्वाद बढ़ाएगा, बल्कि ये विटामिन C का भी बेहतरीन सोर्स है। हां, एक बात याद रखें — तीखे खाने से थोड़ा परहेज़ करें। नहीं जानती प्रेगनेंसी में तीखा खाने से क्या होता है? इससे डिहाइड्रेशन या पेट में जलन की दिक्कत हो सकती है। इसलिए खट्टा खाएं, लेकिन तीखे से थोड़ा बचें।

प्रेगनेंसी में खट्टा खाने की इच्छा को संतुलित कैसे करें?

प्रेगनेंसी में खट्टा खाने का मन कब करता है यह जानना जरूरी है ताकि आप अपनी क्रेविंग्स को सही तरीके से संभाल सकें। अक्सर हार्मोनल बदलाव और शरीर में विटामिन C या आयरन की कमी के कारण यह इच्छा बढ़ जाती है। इसलिए खट्टे फलों या पदार्थों का सेवन संतुलित मात्रा में करें ताकि आपको फायदा हो और नुकसान न हो।

साथ ही, अगर pregnancy me mitha khane ka man karna भी हो तो ऐसे समय में मीठे में फल जैसे आम, तरबूज, अंगूर या केला लेना बेहतर रहता है। ये न केवल स्वाद में मदद करते हैं बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद होते हैं।

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निष्कर्ष 

प्रेगनेंसी में खट्टा खाने का मन क्यों करता है, इसका जवाब शरीर और मन दोनों में हो रहे हार्मोनल और भावनात्मक बदलावों में छिपा है। जब आप सोचती हैं कि pregnancy me imli kha sakte hai या क्या खट्टा खाना सुरक्षित है, तो जान लें कि सीमित मात्रा में यह आपके लिए लाभदायक भी हो सकता है। इसी तरह, कई महिलाओं को pregnancy me mitha khane ka man karna भी होता है, जो शरीर की ऊर्जा की ज़रूरत और हार्मोनल बदलावों का नतीजा होता है। ऐसे में फल जैसे आम, तरबूज, और केले का सेवन करना बेहतर विकल्प होता है। लेकिन प्रेगनेंसी में तीखा खाने से क्या होता है?—तीखा भोजन आपके पेट में जलन और एसिडिटी (acid reflux) बढ़ा सकता है, जिससे डिहाइड्रेशन और असुविधा हो सकती है। 

जैसे-जैसे आपकी प्रेगनेंसी का सफर आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे आने वाले समय में आपके नन्हे शिशु की देखभाल के लिए बेहतरीन उत्पादों की ज़रूरत होगी। टेडी प्रीमियम डायपर पैंट्स खासतौर पर आपके बच्चे की नाज़ुक त्वचा के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जो 12 घंटे तक का सुखद अनुभव और रैशेज़ से पूरी सुरक्षा प्रदान करते हैं। आज ही ख़रीदें।

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Written by Teddyy Editorial Team
Maternal and Baby Care Content Specialist at Teddyy Diapers | Backed by Nobel Hygiene Pvt Ltd (WHO & GMP Certified) with 25+ years of expertise in infant care and hygiene products. Our content is reviewed by parenting specialists.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गर्भ में लड़का होता है तो क्या खाने का मन करता है?

गर्भ में लड़का होने पर अक्सर नमकीन, तीखा या प्रोटीन युक्त चीज़ें खाने का मन करता है, लेकिन यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है।

प्रेगनेंसी में ज्यादा खट्टा खाने का मन क्यों करता है?

आपके शरीर में बदलते एस्ट्रोजन और प्रोएस्ट्रोजन की मात्रा आप में खट्टा खाने की इच्छा पैदा करती हैं। 

प्रेग्नेंट महिला को सुबह उठकर क्या करना चाहिए?

सुबह उठ कर गुनगुना पानी पिएं, टहलें, गहरी सांस लें और पोषण पूर्ण नाश्ता करें। 

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हमारे शरीर में प्रेगनेंसी के समय मेलानिन नाम की पिगमेंट बढ़ने लगते हैं जिससे त्वचा का रंग गहरा हो जाता है।