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प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग: कारण, लक्षण और देखभाल

| Last Updated: July 19, 2026

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होने पर डॉक्टर से परामर्श लेती गर्भवती महिला
WHO-GMP CertifiedTrusted by 5M+ Families25+ Years ExpertiseFact Checked

माँ बनना जितना खूबसूरत एहसास है, उतनी ही माँ बनने की यात्रा मुश्किल। प्रेगनेंसी के दौरान एक महिला बहुत से नए अनुभव करती है, कई परेशानियों से गुज़रती है। इन्हीं में से एक है प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होना। अभी आपके मन में कई सवाल आ रहे होंगे जैसे कि प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग कब होती है, प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग क्यों होती है, या फिर इसे रोकने के घरेलू उपाय। आइए जानते हैं।

Key Takeaways

About This TopicThis article is reviewed by baby care specialists at Teddyy Diapers, backed by Nobel Hygiene Ltd with over 20 years of expertise in infant hygiene products certified by WHO and GMP standards.
  • शुरुआत की प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग के कई कारण हो सकते हैं। प्रेगनेंसी में स्पॉटिंग एक आम बात है, पर अगर ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करना ही बेहतर है।.
  • प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग के ये लक्षण हो सकते हैं,.
  • घरेलू उपायों और सावधानियों से प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग रोकी जा सकती है। इनमें से कुछ उपाय हैं,.
  • प्रेगनेंसी में हल्की ब्लीडिंग होना या स्पॉटिंग होना एक आम बात है, पर अगर बहुत अधिक ब्लीडिंग हो रही है तो डॉक्टर से संपर्क करना ही बेहतर है। अगर आपको बहुत अधिक ब्लीडिंग हो रही है या फिर प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग के लक्षण दिख रहे हैं और आप चिंता में हैं तो 48 से 72 घंटो में डॉक्टर को दिखाना बेहतर होगा।.
  • गर्भावस्था के दौरान अपनी देखभाल कैसे करें, यह जानने के लिए ये लेख पढ़ें। सही जानकारी और समय पर चिकित्सा सलाह लेना बहुत ज़रूरी है। गर्भावस्था के हर चरण में शरीर में कई बदलाव होते हैं जो सामान्य हो सकते हैं।.

पहली तिमाही की प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग के कारण

शुरुआत की प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग के कई कारण हो सकते हैं। प्रेगनेंसी में स्पॉटिंग एक आम बात है, पर अगर ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करना ही बेहतर है।

1 महीने की प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होना सामान्य है, इसके पीछे के कारण ये हो सकते हैं –

  1. गर्भपात – 20 वें हफ़्ते के पहले गर्भ का गिर जाना (miscarriage)।
  2. वजाइनल इन्फेक्शन
  3. हार्मोनल परिवर्तन
  4. संभोग
  5. निषेचित अंडा गर्भाशय की परत में खुद को प्रत्यारोपित करता है, जिसकी वजह से शुरुआत के 6-12 दिनों में हल्की ब्लीडिंग हो सकती है।

2 महीने की प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होना पहली तिमाही का आम हिस्सा है, इसके ये कारण हो सकते हैं –

  1. प्रेगनेंसी के पहले महीने में ब्लीडिंग के दिए गए कारण।
  2. प्रत्यारोपण ब्लीडिंग
  3. पेल्विक टेस्ट या अल्ट्रासाउंड के बाद
  4. पेल्विक टेस्ट, इत्यादि।

3 महीने की प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होना एक आम बात है जो कई गर्भवती महिलाएं अनुभव करती हैं। पर प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग कब होती है? इसके कुछ संभावित कारण हो सकते हैं –

  1. प्रेगनेंसी के पहले और दूसरे महीने में ब्लीडिंग के दिए गए कारण।
  2. बोसरियोनिक हेमेटोमा (subchronic hematoma) की वजह से भी प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग हो सकती है।
  3. प्रेग्नेंसी में यूटेरस की थैली फटने से बच्चा पेट की तरफ खिसक जाता है, जिससे ब्लीडिंग हो सकती है।
  4. एक्टोपिक गर्भावस्था (ectopic pregnancy) – जब गर्भावस्था गर्भशाय के बाहरी रूप से होती है उस स्थिति को एक्टोपिक गर्भावस्था कहा जाता है।
  5. प्लेसेंटा प्रीविया – जब प्लेसेंटा पेट के पूरे या आंशिक हिस्से को घेर लेता है।

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प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग कितनी होती है

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग कितनी होती है इसका कोई सटीक जवाब नहीं है। पर अनुसंधान में माना गया है की शुरुआती 12 हफ्तों में 25% महिलाएं हल्की ब्लीडिंग से गुज़र सकती है। 1 महीने की प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होना सामान्य है और ये चिंताजनक नहीं है। गर्भधारण के 6-12 दिनों के बाद आप हल्की स्पोटिंग अनुभव कर सकती हैं जो कि बिल्कुल सामान्य ह

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग के लक्षण

प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग के ये लक्षण हो सकते हैं,

  1. बेहोशी या चक्कर आना
  2. धड़कनों का तेज़ होना
  3. स्पॉटिंग
  4. पेट में तेज़ दर्द उठना
  5. बुखार और ठंड लगना
  6. पेशाब के वक्त ब्लड आना,
  7. संकुचन (cramps or contractions)
  8. पेल्विक दर्द (pelvic or abdominal pain)
  9. समय से पूर्व प्रसव के लक्षण (premature labour)

प्रेगनेंसी के बाद के ब्लीडिंग के कारण

प्रेगनेंसी में डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग होने को लोचिया कहा जाता है। जन्म देने के 4 से 6 हफ्ते तक ब्लीडिंग हो सकती है। नॉर्मल और सी सेक्शन दोनों में ही ब्लीडिंग होना एक आम बात है। ये रिकवरी के लक्षण होते हैं, जो दर्शाते है कि आपका शरीर शिशु के जन्म से रिकवर हो रहा है। हालांकि 6 हफ्तों के बाद भी ब्लीडिंग होना आम नहीं है और ये चिंताजनक हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग रोकने के घरेलू उपाय

घरेलू उपायों और सावधानियों से प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग रोकी जा सकती है। इनमें से कुछ उपाय हैं,

  1. आराम करें
  2. भारी सामान ना उठाएं
  3. संभोग ना करें
  4. हाइड्रेटेड रहें
  5. यात्रा ना करें
  6. तनाव ना लें
  7. सीढ़ी का इस्तेमाल कम करें, इत्यादि
  8. गंभीर दर्द या ब्लीडिंग होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें

डॉक्टर से कब संपर्क करें

प्रेगनेंसी में हल्की ब्लीडिंग होना या स्पॉटिंग होना एक आम बात है, पर अगर बहुत अधिक ब्लीडिंग हो रही है तो डॉक्टर से संपर्क करना ही बेहतर है। अगर आपको बहुत अधिक ब्लीडिंग हो रही है या फिर प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग के लक्षण दिख रहे हैं और आप चिंता में हैं तो 48 से 72 घंटो में डॉक्टर को दिखाना बेहतर होगा।

इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग: पहचान और समय

गर्भधारण के 6 से 12 दिनों के बीच हल्की ब्लीडिंग हो सकती है जिसे इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग कहते हैं। यह तब होता है जब निषेचित अंडा गर्भाशय की दीवार से चिपकता है। यह ब्लीडिंग आमतौर पर गुलाबी या हल्के भूरे रंग की होती है और एक से दो दिन में रुक जाती है। पीरियड की तुलना में यह बहुत हल्की होती है और इसमें थक्के नहीं होते। अगर आपकी पीरियड की तारीख के आसपास हल्की ब्लीडिंग हो तो यह इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग हो सकती है। प्रेगनेंसी टेस्ट एक हफ्ते बाद सटीक परिणाम देगा।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग के संकेत

एक्टोपिक प्रेगनेंसी तब होती है जब निषेचित अंडा गर्भाशय के बजाय फैलोपियन ट्यूब में विकसित होने लगता है। इसमें हल्की से भारी ब्लीडिंग के साथ एक तरफ तेज़ पेट दर्द, कंधे में दर्द, चक्कर आना और बेहोशी जैसे लक्षण होते हैं। यह एक चिकित्सा आपातकाल है और तुरंत इलाज की ज़रूरत होती है। ट्यूब फटने से पहले निदान ज़रूरी है। अगर आपको प्रेगनेंसी के शुरुआती हफ्तों में ऐसे लक्षण महसूस हों तो बिना देरी के अस्पताल जाएँ। अल्ट्रासाउंड और रक्त परीक्षण से पुष्टि हो जाती है।

प्लेसेंटा प्रीविया और प्लेसेंटल एब्रप्शन

प्लेसेंटा प्रीविया में प्लेसेंटा गर्भाशय के निचले हिस्से में होता है और ग्रीवा को आंशिक या पूरी तरह ढक देता है। इससे दूसरी और तीसरी तिमाही में बिना दर्द वाली ब्लीडिंग होती है। प्लेसेंटल एब्रप्शन में प्लेसेंटा डिलीवरी से पहले ही गर्भाशय की दीवार से अलग हो जाता है — इसमें तेज़ पेट दर्द और ब्लीडिंग दोनों होते हैं। दोनों स्थितियाँ माँ और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हैं। नियमित अल्ट्रासाउंड से प्लेसेंटा की स्थिति पर नज़र रखी जाती है। कोई भी तीसरी तिमाही ब्लीडिंग तुरंत डॉक्टर को दिखानी चाहिए।

गर्भपात के संकेत पहचानें

पहली तिमाही में अधिकांश गर्भपात होते हैं। ब्लीडिंग के साथ पेट में ऐंठन, पीठ में दर्द, थक्के निकलना और प्रेगनेंसी के लक्षणों का अचानक खत्म हो जाना गर्भपात के संकेत हो सकते हैं। लेकिन हर ब्लीडिंग गर्भपात नहीं होती — कई बार हल्की ब्लीडिंग होने पर भी प्रेगनेंसी सुरक्षित रहती है। तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें जो अल्ट्रासाउंड और hCG स्तर से स्थिति का मूल्यांकन करेंगे। भावनात्मक सहारा लेना ज़रूरी है — परिवार, साथी या काउंसलर से बात करें। गर्भपात के बाद शारीरिक और मानसिक ठीक होने में समय लगता है।

ब्लीडिंग के दौरान क्या करें और क्या न करें

ब्लीडिंग शुरू होते ही आराम करें और लेट जाएँ। पैड का उपयोग करें, टैम्पोन नहीं। ब्लीडिंग की मात्रा, रंग और थक्कों की उपस्थिति नोट करें ताकि डॉक्टर को बता सकें। भारी सामान उठाने, सेक्स करने, तेज़ व्यायाम करने और लंबी दूरी की यात्रा से बचें। पानी खूब पिएँ और पोषक आहार लें। अनावश्यक चिंता न करें लेकिन लापरवाही भी न करें। कोई भी घरेलू नुस्खा या जड़ी-बूटी बिना डॉक्टर की सलाह के न लें। तनाव कम करने के लिए गहरी सांस लेने के अभ्यास करें।

ब्लीडिंग के बाद की जाँचें और उपचार

डॉक्टर पहले आपका ब्लड प्रेशर, हृदय गति और पेट की जाँच करेंगे। अल्ट्रासाउंड से बच्चे की धड़कन और प्लेसेंटा की स्थिति देखी जाती है। beta-hCG और प्रोजेस्टेरोन स्तर के लिए रक्त परीक्षण किया जाता है। Rh-नेगेटिव माओं को एंटी-डी इंजेक्शन दिया जाता है ताकि भविष्य की प्रेगनेंसी सुरक्षित रहे। स्थिति के अनुसार बेड रेस्ट, प्रोजेस्टेरोन सप्लीमेंट्स या अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी जा सकती है। नियमित फॉलो-अप बहुत ज़रूरी है।

भावनात्मक सहारा और मानसिक स्वास्थ्य

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होना अत्यंत चिंताजनक अनुभव होता है। डर, अनिश्चितता और अपराध बोध महसूस करना स्वाभाविक है। अपनी भावनाओं को दबाएँ नहीं — साथी, करीबी मित्र या परिवार से बात करें। यदि गर्भपात हो जाता है तो शोक मनाने का अधिकार आपका है। मातृ सहायता समूहों से जुड़ना या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेना फायदेमंद है। याद रखें कि ब्लीडिंग की वजहें आपके नियंत्रण में नहीं होतीं — खुद को दोष देना बंद करें। भविष्य की प्रेगनेंसी की योजना बनाने से पहले शरीर और मन दोनों को ठीक होने का समय दें।

संबंधित लेख

गर्भावस्था के दौरान अपनी देखभाल कैसे करें, यह जानने के लिए ये लेख पढ़ें। सही जानकारी और समय पर चिकित्सा सलाह लेना बहुत ज़रूरी है। गर्भावस्था के हर चरण में शरीर में कई बदलाव होते हैं जो सामान्य हो सकते हैं।

चिकित्सा जानकारी के लिए World Health Organization पर जाएं।

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में ब्लड क्यों आता है?

2 महीने की प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होना, इसकी वजह हो सकती है इन्फेक्शन, गर्भपात, संबंध बनाना, प्रत्यारोपण ब्लीडिंग, इत्यादि।

प्रेगनेंसी में ब्लड आ जाए तो क्या करना चाहिए?

प्रेगनेंसी में ब्लड आने पर आप पैंटी लाइनर या पद का इस्तेमाल करें, संबंध बनाने से बचें और ब्लीडिंग बढ़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग रोकने के लिए कौन सा इंजेक्शन दिया जाता है?

ट्रैपिक 100 mg नाम का इन्जेक्शन प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग रोकने के लिए दिया जाता है।

ब्लीडिंग रोकने के लिए क्या खाना चाहिए?

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग रोकने के लिए अमरूद के पत्तों का सेवन किया जा सकता है।

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Written by Teddyy Editorial Team
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