डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग रोकने के उपाय: देखभाल और सुझाव
By Nobel Hygiene Team | Last Updated: February 24, 2026
डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग, जिसे पोस्टपार्टम ब्लीडिंग (Postpartum Bleeding) कहा जाता है, एक सामान्य प्रक्रिया है। जन्म (birth) या बच्चे को जन्म देने (giving birth) के बाद, महिलाओं (women) के शरीर (body) में कई बदलाव होते हैं, खासकर गर्भाशय (uterus) में, जो प्रसव (childbirth) के बाद प्राकृतिक रूप से ठीक होने की प्रक्रिया का हिस्सा है। सभी महिलाएं, चाहे डिलीवरी का तरीका कोई भी हो, इन बदलावों से गुजरती हैं क्योंकि उनका शरीर (body) प्रसव (childbirth) के बाद ठीक होता है। यह रक्तस्राव प्रसव के बाद गर्भाशय से प्लेसेंटा (अम्बिलिकल कोर्ड के साथ जुड़ा हिस्सा) के अलग होने के कारण से होता है। हालांकि यह प्रक्रिया सामान्य है, लेकिन अत्यधिक ब्लीडिंग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। आइए जानते हैं कि डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग क्यों होती है, डिलीवरी के बाद पीरियड कब तक आता है और डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग रोकने के उपाय। क्यों इन उपायों को अपनाना आवश्यक है? आइए विस्तार से जानते हैं.
डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग क्यों होती है? (Postpartum Bleeding)
डिलीवरी के बाद होने वाली ब्लीडिंग एक आम प्रक्रिया है, इसके अनेक कारण हैं, आइए हम इन कारणों को विस्तार से समझते हैं।
- प्लेसेंटा का पूरी तरह अलग ना होना : जब बच्चे गर्भ में होते हैं तब प्लेसेंटा उन्हें पोषक तत्व पहुंचाता है, पर बच्चे के जन्म के बाद ये शरीर से बाहर आ जाता है। पर कई बार ये प्लेसेंटा पूरी तरह से बाहर नहीं आ पाता है तो आपको रक्त रिसाव की समस्या होती है।
- युटेरस का संकुचन ना होना: कई बार डिलीवरी के बाद आपका गर्भाशय जल्दी संकुचित नहीं हो पाता, जिससे आपको रक्त रिसाव होता रहता है।
- इनफेक्शन: कई बार प्रसव के दौरान आपको इन्फेक्शन का खतरा होता है। इंफेक्शन हो जाने के कारण से कई केसेस में रक्त आना बंद नहीं होता जो समस्यात्मक है।
डिलीवरी के बाद होने वाला यह रक्तस्राव मेडिकल भाषा में ‘लोचिया’ (lochia) कहलाता है, जो प्रसव के बाद गर्भाशय से निकलने वाला डिस्चार्ज है। लोचिया अलग-अलग stages (चरणों) में होता है, और हर stage शरीर के ठीक होने की प्रक्रिया को दर्शाता है।
डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग क्यों होती है यह जानने के साथ-साथ ज़रूरी है किआप इस दौरान बरती जाने वाली सावधानियों को भी समझें ताकि आपको जटिलताओं का सामना ना करना पड़े और आप स्वस्थ रहें।
postpartum hemorrhage डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग के प्रमुख कारण
डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग कितने दिन होती है ये जानने से पहले जानते हैं इसके कई प्रमुख कारण जो डिलीवरी के बाद होने वाली ब्लीडिंग को प्रभावित करते हैं:
- बहुत अधिक प्रसव पीड़ा: कई बार प्रसव में 48 से 72 घंटे का समय लग जाता है, इतने लंबे समय तक प्रसव पीड़ा में होने के कारण आपका गर्भाशय कमज़ोर हो जाता है। इससे आपको ब्लीडिंग की समस्या बढ़ जाती है।
- सर्जिकल डिलीवरी: जब C section डिलीवरी होती है तो कई बार रक्त वाहिनी ठीक से बंद नहीं हो पाती जिस कारण से आपका रक्त रिसाव बंद नहीं हो पाता। इससे आपको कई स्वास्थ संबंधी जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, सामान्य डिलीवरी (vaginal birth) के बाद रिकवरी और ब्लीडिंग का अनुभव अलग हो सकता है, और ब्लीडिंग की मात्रा व अवधि दोनों ही डिलीवरी के प्रकार पर निर्भर करती हैं।
- यूटरस या प्लेसेंटा में डिफॉर्मेशन: अधिक रक्त रिसाव की समस्या तब उत्पन्न होती है जब आपके गर्भाशय या फिर प्लेसेंटा में कोई विकृति हो जैसे की : प्लेसेंटा प्रीविया या प्लेसेंटा एक्रेटा। ऐसे में आपको रक्त रिसाव की समस्या बढ़ जाएगी।
पोस्टपार्टम ब्लीडिंग की अवधि (duration) हर महिला के लिए अलग हो सकती है, लेकिन आमतौर पर यह 4 से 6 हफ्ते तक रहती है और समय के साथ ब्लीडिंग की मात्रा में धीरे-धीरे decrease (कमी) आती है क्योंकि शरीर धीरे-धीरे ठीक होता है।
और पढ़े: प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग: कारण, लक्षण और देखभाल
लोकिया रबरा और लोकिया सेरोसा
डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग यानी पोस्टपार्टम ब्लीडिंग के दौरान शरीर में कई बदलाव होते हैं, जिनमें लोकिया रबरा और लोकिया सेरोसा दो महत्वपूर्ण चरण हैं। लोकिया रबरा, डिलीवरी के तुरंत बाद शुरू होता है और इसमें गर्भाशय की परत, रक्त और कुछ टिश्यू बाहर निकलते हैं। यह चरण आमतौर पर 3 से 5 दिनों तक चलता है और इसमें ब्लीडिंग का रंग गहरा लाल होता है, जो भारी भी हो सकता है। इस दौरान महिलाओं को बड़े साइज के मैटरनिटी पैड का इस्तेमाल करना चाहिए और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि संक्रमण का खतरा कम हो सके।
इसके बाद लोकिया सेरोसा का चरण आता है, जो लगभग 5 से 10 दिनों तक चलता है। इसमें ब्लीडिंग की मात्रा धीरे-धीरे कम होने लगती है और रंग हल्का गुलाबी या भूरा हो जाता है। यह संकेत है कि शरीर धीरे-धीरे रिकवर कर रहा है और गर्भाशय अपनी सामान्य स्थिति में लौट रहा है। इन दोनों चरणों के दौरान आराम करना, पर्याप्त पानी पीना और साफ-सफाई बनाए रखना जरूरी है। अगर ब्लीडिंग की मात्रा अचानक बढ़ जाए या बदबूदार डिस्चार्ज हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इन स्टेजेस को समझना और सही देखभाल करना पोस्टपार्टम ब्लीडिंग को प्रभावी ढंग से मैनेज करने के लिए जरूरी है।
पोस्टपार्टम हेमरेज
पोस्टपार्टम हेमरेज (Postpartum Hemorrhage) डिलीवरी के बाद होने वाली एक गंभीर स्थिति है, जिसमें अत्यधिक ब्लीडिंग होती है। यह समस्या सामान्य ब्लीडिंग से अलग होती है और अगर समय पर इलाज न मिले तो जानलेवा भी हो सकती है। पोस्टपार्टम हेमरेज के मुख्य कारणों में गर्भाशय का पूरी तरह से संकुचित न होना, प्लेसेंटा का पूरी तरह बाहर न आना, या डिलीवरी के दौरान गर्भाशय या आसपास के टिश्यू में चोट लगना शामिल है।
इसके लक्षणों में अचानक बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होना, बड़े रक्त के थक्के (blood clots) निकलना, तेज पेट दर्द, कमजोरी, चक्कर आना या बेहोशी आना शामिल हैं। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को डिलीवरी के बाद ऐसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। पोस्टपार्टम हेमरेज के इलाज में दवाएं, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, या जरूरत पड़ने पर सर्जरी भी की जा सकती है। समय पर पहचान और इलाज से इस स्थिति को कंट्रोल किया जा सकता है, इसलिए किसी भी असामान्य ब्लीडिंग को नजरअंदाज न करें।
ब्लीडिंग के चेतावनी संकेत
डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग के दौरान कुछ ऐसे चेतावनी संकेत होते हैं, जिन पर तुरंत ध्यान देना जरूरी है। अगर ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो रही है और हर घंटे पैड बदलना पड़ रहा है, या ब्लड क्लॉट्स (रक्त के थक्के) बड़े आकार के निकल रहे हैं, तो यह सामान्य नहीं है। इसके अलावा, अगर डिस्चार्ज से तेज बदबू आ रही है, तेज पेट या पेल्विक दर्द हो रहा है, बुखार आ रहा है, या शरीर में कमजोरी और चक्कर जैसा महसूस हो रहा है, तो ये संक्रमण या अन्य जटिलताओं का संकेत हो सकते हैं।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज से संक्रमण, एनीमिया या अन्य गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है। पोस्टपार्टम ब्लीडिंग के दौरान अपने शरीर के संकेतों को समझना और सतर्क रहना, मां के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।
डिलीवरी के बाद कितने दिन तक ब्लीडिंग रहती है
डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग, जिसे पोस्टपार्टम ब्लीडिंग या लोकिया (lochia) कहा जाता है, आमतौर पर 4 से 6 हफ्तों तक हो सकती है। यह ब्लीडिंग गर्भाशय की स्वाभाविक सफाई का हिस्सा है, जो हर महिला के लिए अलग-अलग हो सकती है। डिलीवरी के बाद पहले कुछ दिनों में ब्लीडिंग का रंग गहरा लाल होता है, जिसे लोकिया रूब्रा (lochia rubra) कहा जाता है। यह चरण आमतौर पर 3 से 5 दिन तक चलता है। इसके बाद ब्लीडिंग हल्के गुलाबी या भूरे रंग की हो जाती है, जिसे लोकिया सेरोसा (lochia serosa) कहते हैं, और यह लगभग 5 से 10 दिन तक रहती है। अंत में, ब्लीडिंग सफेद या पीले रंग के डिस्चार्ज (lochia alba) में बदल जाती है, जो 2 से 4 हफ्तों तक जारी रह सकती है।
नॉर्मल डिलीवरी (vaginal birth) के बाद ब्लीडिंग आमतौर पर 4 से 6 हफ्तों तक चलती है, जबकि सिजेरियन डिलीवरी (c section) के बाद यह अवधि थोड़ी कम, यानी लगभग 2 से 4 हफ्तों तक हो सकती है। इसका कारण यह है कि सिजेरियन डिलीवरी के दौरान गर्भाशय की सफाई सर्जरी के समय ही कर दी जाती है, जिससे ब्लीडिंग की अवधि कम हो जाती है। हालांकि, हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए ब्लीडिंग की अवधि और मात्रा में अंतर हो सकता है।
पोस्टपार्टम ब्लीडिंग को manage करने के लिए स्वच्छता बनाए रखना बहुत जरूरी है। हमेशा साफ और बड़े साइज के मैटरनिटी पैड का इस्तेमाल करें और पैड को समय-समय पर बदलें। ब्लीडिंग की मात्रा, रंग और गंध पर ध्यान दें। ब्रेस्टफीडिंग (breastfeeding) भी गर्भाशय के संकुचन में मदद करता है, जिससे ब्लीडिंग की अवधि कम हो सकती है और uterus जल्दी अपनी सामान्य स्थिति में लौट आता है।
अगर डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग सामान्य से ज्यादा हो, लंबे समय तक जारी रहे, या उसमें बदबू, तेज दर्द, बुखार या बड़े blood clots दिखें, तो यह संक्रमण या अन्य जटिलता का संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, ताकि सही diagnosis और effective treatment मिल सके।
डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग की अवधि और तीव्रता को समझना और उसका सही तरीके से management करना मां के स्वास्थ्य के लिए essential है। अगर आपको अपनी postpartum bleeding के बारे में कोई चिंता है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। वे आपकी स्थिति के अनुसार उचित tips और treatment बता सकते हैं, जिससे आप स्वस्थ और सुरक्षित रह सकें।
प्राकृतिक तरीके से manage postpartum bleeding को नियंत्रित करना
डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग कितने दिन होती है– तो ये प्रक्रिया 1 से 1.5 महीने चलती है। डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग रोकने के उपाय कई बार प्राकृतिक भी हो सकते हैं। आइए जानते हैं कुछ उपाय जिससे आप अपने गर्भाशय से होने वाली ब्लीडिंग को रोक सकती हैं और manage postpartum bleeding कर सकती हैं:
- गर्भाशय की मालिश करिए। जब आप हल्के हांथ से इसे दबाएंगी तो इससे आपके गर्भाशय में संकुचन होगा।
- जब आप स्तनपान (breastfeeding) करातीं हैं तो आपका शरीर ऑक्सीटोसिन हार्मोंस बनाता है, जिससे गर्भाशय में संकुचन बढ़ता है और कभी-कभी ब्लीडिंग व क्रैम्प्स बढ़ सकते हैं। हालांकि, breastfeeding से गर्भाशय जल्दी सिकुड़ता है और ब्लीडिंग कम करने में भी मदद मिलती है, इसलिए यह postpartum bleeding को manage करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- अपने शरीर को पर्याप्त मात्रा में आराम दें, इससे आपकी ब्लीडिंग कम होगी।
प्राकृतिक उपायों के साथ-साथ, यह भी जानना essential है कि पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और खुद को हाइड्रेटेड रखना postpartum recovery के लिए बहुत जरूरी है।
नीचे कुछ tips दिए गए हैं, जिनकी मदद से आप postpartum bleeding को manage कर सकती हैं:
- हमेशा साफ और आरामदायक सैनिटरी/मैटरनिटी पैड का इस्तेमाल करें।
- ब्लीडिंग या lochia के रंग और मात्रा पर ध्यान दें।
- अत्यधिक ब्लीडिंग, तेज दर्द या बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें ताकि संक्रमण से बचा जा सके।
Normal Bleeding vs. Hemorrhage Symptoms
| संकेत/लक्षण | Normal Postpartum Bleeding (Lochia) | Hemorrhage (अत्यधिक रक्तस्राव) |
| रक्त का रंग | लाल → गुलाबी/भूरा → पीला/सफेद | तेज लाल, बहुत गहरा रंग |
| मात्रा | 4–6 हफ्तों तक धीरे-धीरे कम होती | अचानक भारी, पैड जल्दी भरा जा रहा |
| रक्त का थक्का | छोटे-छोटे थक्के (2.5 cm से छोटे) | बड़े थक्के (2.5 cm से बड़े) |
| दर्द | हल्का या सामान्य गर्भाशय संकुचन | तेज दर्द/गर्भाशय में असमान दर्द |
| बदनामी | सामान्य थकान | चक्कर, कमजोरी, सांस की तकलीफ |
| बुखार | नहीं | बुखार, तेज़ दिल की धड़कन |
कब डॉक्टर को तुरंत दिखाएँ:
यदि 1 घंटे में 2 पैड से ज्यादा रक्त बह रहा हो, बड़े थक्के आ रहे हों, बेहोशी/चक्कर, तेज़ दर्द या साँस लेने में कठिनाई।
Home Remedies with Dosage and Preparation
1) अजवाइन का पानी
- कितना लें: 1 चम्मच अजवाइन
- बनाने का तरीका: 1 गिलास पानी में अजवाइन डालें, उबालें, 5 मिनट बाद छानें।
- कैसे लें: दिन में 2 बार (सुबह और शाम) गर्म पिएँ।
- लाभ: रक्तस्राव को नियंत्रित करने में मदद, पाचन बेहतर।
2) हल्दी वाला दूध
- कितना लें: 1 गिलास दूध + 1/2 चम्मच हल्दी
- बनाने का तरीका: दूध गरम करें, हल्दी मिलाएँ।
- कैसे लें: 1 बार सोने से पहले।
- लाभ: सूजन और रक्तस्राव को शांत करने में सहायक।
3) अदरक-तुलसी का काढ़ा
- सामग्री: 1 इंच अदरक + 6–8 तुलसी के पत्ते + 2 गिलास पानी
- बनाने का तरीका: पानी उबालें, अदरक और तुलसी डालकर 10 मिनट उबालें। छानकर लें।
- कैसे लें: दिन में 1 बार।
- लाभ: रक्त संचार संतुलित, इम्यूनिटी मजबूत।
ध्यान: अगर घर पर उपाय से भी अत्यधिक रक्तस्राव जारी रहे, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
Timeline Infographic (Text): डिलीवरी के बाद रिकवरी की जर्नी (Week 1–6)
| सप्ताह | क्या Expect करें | ध्यान देने योग्य बातें |
| Week 1 | भारी bleeding शुरु, uterine contraction | बहुत थकान, आराम जरूरी |
| Week 2 | bleeding थोड़ी कम, पेट में खिंचाव महसूस | हल्का चलना ठीक, भारी काम न करें |
| Week 3 | रंग हल्का गुलाबी/भूरा | पोषण से खून की रिकवरी में मदद |
| Week 4 | bleeding और कम, small clots | हल्की एक्सरसाइज (डॉक्टर की सलाह) |
| Week 5 | lochia पीला/सफेद होना शुरू | आराम + हल्की सैर अच्छा |
| Week 6 | bleeding लगभग बंद | pelvic floor exercises शुरू |
Note: हर महिला का recovery pace अलग होता है; अगर रक्तस्राव abnormal लगे, तुरंत हेल्थकेयर प्रोफेशनल से संपर्क करें।
ब्लीडिंग रोकने के लिए blood transfusion और घरेलू उपाय
डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग कितने दिन होती है – इसकी जानकारी होना भी बहुत जरूरी है। तो यह समस्या आपको 21 दिन से 42 दिन तक चल सकती है। आइए जानें इसे रोकने के घरेलू उपाय:
- अजवाइन और मेथी का काढ़ा पीएं।
- 15 से 20 दिनों तक गरम पानी का सेवन करें।
- हल्दी और गुड़ का भरपूर सेवन करें।
- जीरा और सौंफ की चाय बनाकर पीएं।
डिलीवरी के बाद मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना
डिलीवरी के बाद पीरियड कब तक आता है? ये 3 से 6 हफ़्ते चलनी वाली समस्या है, आइए जानें कैसे रखें इस दौरान आप खुद को स्वस्थ:
- पोषण से भरपूर भोजन का सेवन करें।
- मेडिटेशन और योगा करें।
- अगर ब्लीडिंग ज्यादा है या अन्य कोई असामान्य लक्षण दिखें तो फौरन डाक्टर से मिलें, ताकि समय पर सही diagnosis हो सके और उचित treatment मिल सके। डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि सही diagnosis और treatment से जटिलताओं से बचा जा सकता है।
- अपने आसपास के लोगों से सहायता लें और खुश रहें।
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अगर ब्लीडिंग न रुके तो क्या करें
अगर डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग सामान्य समय से ज्यादा लंबी चल रही है या उसकी मात्रा लगातार अधिक बनी हुई है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले डॉक्टर से संपर्क करें, ताकि सही डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट मिल सके। डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार दवाएं, ब्लड ट्रांसफ्यूजन या जरूरत पड़ने पर सर्जरी जैसी चिकित्सा की सलाह दे सकते हैं।
घर पर, स्वच्छता बनाए रखें, आराम करें और पर्याप्त मात्रा में पानी व पौष्टिक आहार लें। मैटरनिटी पैड का इस्तेमाल करें और ब्लीडिंग की मात्रा पर नजर रखें। अगर आपको तेज दर्द, बुखार, बदबूदार डिस्चार्ज या कमजोरी महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। पोस्टपार्टम ब्लीडिंग को प्रभावी ढंग से मैनेज करने के लिए नियमित जांच और डॉक्टर के संपर्क में रहना जरूरी है। सही देखभाल और समय पर इलाज से मां का स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है।
निष्कर्ष
डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग रोकने के उपाय न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। नियमित जांच, सही पोषण और घरेलू उपचार अपनाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है। अगर ब्लीडिंग सामान्य से अधिक हो, तो इसे नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से सलाह लें। सही देखभाल और उपायों से मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है। प्रैक्टिकल tips का पालन करना और समय पर treatment लेना postpartum bleeding को manage करने के लिए जरूरी है, जिससे मां और बच्चे की भलाई सुनिश्चित होती है।
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Faq's
1. डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग कितने दिन तक रहती है?
डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग (लोशिया) सामान्य रूप से 4 से 6 हफ्तों तक रहती है, और कुछ मामलों में यह 8 हफ्तों तक भी जारी रह सकती है।
2. डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग के कौन-कौन से चरण होते हैं?
- पहला चरण: डिलीवरी के बाद कुछ दिनों तक लाल रंग का खून निकलता है।
- दूसरा चरण: कुछ दिनों बाद खून गुलाबी या भूरे रंग का हो जाता है।
- तीसरा चरण: अंत में पीले या सफेद रंग का डिस्चार्ज होता है, जो धीरे-धीरे बंद हो जाता है।
3. डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग को नियंत्रित करने के घरेलू उपाय क्या हैं?
- ज्यादा आराम करें और भारी काम न करें।
- सैनिटरी पैड का उपयोग करें, टैम्पोन नहीं।
- डिस्चार्ज के रंग और मात्रा पर ध्यान दें।
- पर्याप्त पानी पिएं और पौष्टिक भोजन करें।
4. कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर आपको ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें —
- एक घंटे में पैड पूरी तरह भीग जाए।
- ब्लीडिंग कम होने के बजाय बढ़ने लगे।
- बड़े थक्के, चक्कर आना, या बदबूदार डिस्चार्ज हो।
5. क्या सी-सेक्शन के बाद भी ब्लीडिंग होती है?
हाँ, सी-सेक्शन के बाद भी कुछ दिनों तक ब्लीडिंग होती है। हालांकि, इसका फ्लो थोड़ा हल्का हो सकता है और रिकवरी में थोड़ा समय लग सकता है।
6. क्या ब्लीडिंग को जल्दी रोकने का कोई तरीका है?
ब्लीडिंग अपने आप धीरे-धीरे कम होती है, लेकिन इसे नियंत्रित रखने के लिए —
- हल्की वॉक करें (डॉक्टर की अनुमति के बाद)।
- भारी वजन उठाने से बचें।
- पानी पिएं और आयरन से भरपूर आहार लें।
- डॉक्टर की सलाह का पालन करें।
