facebook pixel प्रेगनेंसी में कमर दर्द: कारण और राहत के उपाय - Teddy Diaper
  • Home
  • Blog
  • प्रेगनेंसी में कमर दर्द: कारण, लक्षण और राहत के उपाय

प्रेगनेंसी में कमर दर्द: कारण, लक्षण और राहत के उपाय

| Last Updated: April 9, 2026

5 4
WHO-GMP CertifiedTrusted by 5M+ Families25+ Years ExpertiseFact Checked

गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई बदलाव होते हैं, और पीठ या कमर में दर्द इनमें सबसे आम समस्या है। एक अध्ययन के अनुसार लगभग 50-80% गर्भवती महिलाएं इस तकलीफ का अनुभव करती हैं। बढ़ता वजन, हॉर्मोनल बदलाव, और शरीर के गुरुत्वाकर्षण केंद्र में परिवर्तन, ये सब मिलकर पीठ पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि गर्भावस्था में कमर दर्द क्यों होता है, कब शुरू होता है, इसके लक्षण क्या हैं, और राहत पाने के सबसे असरदार तरीके कौन से हैं।

Key Takeaways
✅ गर्भावस्था में पीठ दर्द का मुख्य कारण रिलैक्सिन हॉर्मोन, बढ़ता गर्भाशय भार, और शरीर के संतुलन केंद्र में बदलाव है।
✅ दूसरी और तीसरी तिमाही में दर्द सबसे अधिक होता है, लेकिन कुछ महिलाओं को पहली तिमाही से ही हल्का दर्द शुरू हो सकता है।
✅ कैट-काउ स्ट्रेच, पेल्विक टिल्ट, ब्रिज पोज़ और नियमित सैर जैसे व्यायाम दर्द से काफी राहत दे सकते हैं।
✅ अगर दर्द तेज़ हो, पैरों में सुन्नपन आए, या बुखार के साथ हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

प्रेगनेंसी में कमर दर्द के सामान्य कारण

About This TopicThis article is reviewed by baby care specialists at Teddyy Diapers, backed by Nobel Hygiene Pvt Ltd with over 20 years of expertise in infant hygiene products certified by WHO and GMP standards.

सबसे जरूरी है कि आप ये समझें कि प्रेगनेंसी में कमर में दर्द क्यों होता है। एक बार जब आपको इसके पीछे के कारण समझ में आ जाते हैं, तो आप इसका सही इलाज और देखभाल कर सकती हैं। आमतौर पर प्रेगनेंसी के दूसरे या तीसरे तिमाही में जब शरीर में बदलाव और वजन बढ़ता है, तब कमर में दर्द होना होना शुरू हो सकता है, खासकर जब आप लंबे समय तक खड़ी रहती हैं या अचानक कोई भारी चीज उठाती हैं। आइए जानते हैं कुछ मुख्य कारण:

  1. प्रेगनेंसी के दौरान आपके शरीर में रिलैक्सिन नाम के हार्मोन्स का रिसाव होता है, जो आपके पेल्विक लिगामेंट्स को ढीला कर देता है और इससे कमर दर्द होता है।
  2. इस समय आपके शरीर और गर्भाशय का वजन और आकार बढ़ने से कमर और आसपास के हिस्सों पर दबाव बढ़ता है, जिससे दर्द और असहजता महसूस हो सकती है।
  3. जब आपकी शारीरिक मुद्रा खराब हो तो इससे आपके कमर पर असर पड़ता है जिससे दर्द होता है।

इन सभी कारणों को जानने के बाद, आप बेहतर तरीके से समझ पाएंगी कि प्रेगनेंसी में कमर में दर्द क्यों होता है और इसके इलाज के लिए क्या कदम उठाने चाहिए।

प्रेगनेंसी के किस महीने में कमर दर्द शुरू होता है

हर महिला को उसकी शारीरिक बनावट के अनुसार अलग-अलग समय पर कमर दर्द हो सकता है। इसका कोई एक समय नहीं होता। कमर का दर्द इस बात पर निर्भर करता है कि आपके शरीर में बदलाव कितना अधिक और कितने तेज़ी से हो रहे हैं। गर्भावस्था के दौरान कमर की तकलीफ़ कब होती है? यह इस बात पर निर्भर करता है कि जैसे-जैसे आपका वजन बढ़ता है, आपकी कमर पर दबाव बढ़ता है, जिससे दर्द शुरू हो सकता है। आमतौर पर, ये दर्द 4 से 6 महीने के बीच महसूस होना शुरू हो जाता है।

प्रेगनेंसी में कमर दर्द के लक्षण

गर्भावस्था में पीठ की तकलीफ़ के लक्षण हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ आम लक्षण ऐसे हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आमतौर पर, पीठ के निचले हिस्से में दर्द या जकड़न महसूस होना सबसे सामान्य लक्षण है। इसके अलावा, कई बार पीठ में ऐंठन या खिंचाव भी हो सकता है, जिससे चलने-फिरने में परेशानी महसूस होती है। कुछ महिलाओं को पैरों में सुन्नता या कमजोरी का अनुभव भी हो सकता है, जो कभी-कभी निचले हिस्से में दर्द के साथ जुड़ा होता है।

अगर आपको पेशाब या मल त्याग में समस्या हो रही है, या बुखार जैसे अन्य संक्रमण के लक्षण दिखाई दें, तो यह संकेत हो सकता है कि दर्द सामान्य से अधिक है। ऐसे लक्षणों के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है, ताकि समय रहते सही उपचार और देखभाल मिल सके।

प्रेगनेंसी में कमर दर्द से राहत के लिए स्ट्रेचिंग करती महिला

प्रेगनेंसी के पहले महीने में कमर दर्द क्यों होता है

अक्सर महिलाएं जानना चाहती हैं कि प्रेगनेंसी में कमर दर्द कब होता है। आमतौर पर यह दूसरी और तीसरी तिमाही में अधिक होता है।

प्रेगनेंसी के पहले महीने में कमर दर्द होना एक आम लक्षण है और यह शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण होता है। इस दौरान प्रोजेस्टेरोन हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे मांसपेशियों और लिगामेंट्स में ढीलापन आता है ताकि शरीर गर्भधारण के लिए तैयार हो सके। इसके साथ ही, गर्भाशय का धीरे-धीरे फैलना भी रीढ़ और पीठ की मांसपेशियों पर असर डाल सकता है, जिससे हल्का या मध्यम कमर दर्द महसूस हो सकता है। यह संकेत करता है कि शरीर अंदर से बदलाव की प्रक्रिया में है, हालांकि अगर दर्द बहुत तेज हो तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी होता है।

गर्भावस्था में पीठ दर्द से राहत के लिए व्यायाम

सही व्यायाम पीठ की मांसपेशियों को मज़बूत बनाते हैं और दर्द को काफ़ी हद तक कम करते हैं। ACOG के अनुसार गर्भावस्था में नियमित हल्का व्यायाम सुरक्षित और फ़ायदेमंद है। नीचे दिए गए व्यायाम डॉक्टर की सलाह से शुरू करें:

1. कैट-काउ स्ट्रेच (Cat-Cow Stretch)

दोनों घुटनों और हथेलियों पर आएं (टेबलटॉप पोज़िशन)। सांस लेते हुए पीठ को नीचे की ओर झुकाएं और सिर ऊपर उठाएं (काउ पोज़)। सांस छोड़ते हुए पीठ को ऊपर की ओर गोल करें और ठोड़ी छाती की तरफ़ लाएं (कैट पोज़)। यह रीढ़ की हड्डी में लचीलापन लाता है और पीठ के निचले हिस्से का तनाव कम करता है।
अवधि: 8-10 बार दोहराएं, दिन में 2 बार। तीनों तिमाही में सुरक्षित।

2. पेल्विक टिल्ट (Pelvic Tilt)

पीठ के बल लेटें, घुटने मोड़ें और पैर ज़मीन पर रखें। सांस छोड़ते हुए कमर को ज़मीन की तरफ़ दबाएं और पेल्विक हिस्से को हल्का ऊपर उठाएं। 5 सेकंड रुकें, फिर सांस लेते हुए वापस आएं। यह पेल्विक और पेट की मांसपेशियों को मज़बूत करता है।
अवधि: 10-15 बार, दिन में 2 बार। दूसरी तिमाही के बाद दीवार के सहारे खड़े होकर करें।

3. ब्रिज पोज़ (Bridge Pose)

पीठ के बल लेटें, घुटने मोड़ें। सांस छोड़ते हुए कूल्हों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं जब तक जांघ और शरीर एक सीधी रेखा में न आ जाएं। 5-10 सेकंड रुकें, फिर धीरे-धीरे नीचे आएं। यह ग्लूट्स और पीठ के निचले हिस्से को मज़बूत बनाता है।
अवधि: 8-10 बार, दिन में 1-2 बार। तीसरी तिमाही में असुविधा हो तो बंद करें।

4. वॉल स्क्वॉट (Wall Squat)

दीवार से पीठ टिकाकर खड़ी हों। पैर कंधे की चौड़ाई पर रखें। धीरे-धीरे घुटने मोड़ते हुए नीचे बैठें जैसे कुर्सी पर बैठ रही हों। 10-15 सेकंड रुकें, फिर ऊपर आएं। यह जांघों और पीठ की मांसपेशियों को एक साथ मज़बूत करता है।
अवधि: 5-8 बार, दिन में 1 बार। तीनों तिमाही में सुरक्षित।

5. नियमित सैर (Walking)

रोज़ाना 20-30 मिनट की हल्की सैर मांसपेशियों को सक्रिय रखती है, रक्त प्रवाह बढ़ाती है, और पीठ दर्द को कम करती है। सुबह या शाम का समय सबसे अच्छा है। आरामदायक जूते पहनें और समतल रास्ते पर चलें।
अवधि: रोज़ 20-30 मिनट। पूरी गर्भावस्था में सुरक्षित।

सावधानी: कोई भी व्यायाम शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें। अगर व्यायाम के दौरान दर्द बढ़े, चक्कर आए, या सांस फूले तो तुरंत रुकें।

गर्भावस्था में पीठ दर्द के घरेलू उपाय

दवाइयों से पहले कई घरेलू तरीके दर्द से राहत दे सकते हैं:

1. गर्म सिकाई (Hot Compress)

गर्म पानी की बोतल या हीटिंग पैड को दर्द वाली जगह पर 15-20 मिनट रखें। गर्माहट मांसपेशियों को ढीला करती है और रक्त प्रवाह बढ़ाती है। दिन में 2-3 बार कर सकती हैं।

2. ठंडी सिकाई (Cold Compress)

अगर सूजन हो तो पहले 48 घंटे ठंडी सिकाई करें। बर्फ़ को कपड़े में लपेटकर 10-15 मिनट लगाएं। इससे सूजन और तीव्र दर्द में राहत मिलती है।

3. प्रीनेटल मसाज (Prenatal Massage)

किसी प्रशिक्षित प्रीनेटल मसाज थेरेपिस्ट से हल्की मालिश करवाएं। करवट लेटकर पीठ और कमर की मालिश दर्द कम करती है। तिल या नारियल तेल गर्म करके हल्के हाथों से मसाज भी घर पर की जा सकती है।

4. गर्म पानी से स्नान

गुनगुने पानी से नहाने से मांसपेशियों का तनाव कम होता है। पानी का तापमान 37-38°C से अधिक न हो। 15-20 मिनट तक स्नान करें।

5. तकिये का सही इस्तेमाल

प्रेगनेंसी पिलो (U-आकार या C-आकार) पीठ, पेट, और घुटनों को एक साथ सहारा देता है। बैठते समय भी कमर के पीछे एक छोटा तकिया लगाएं।

6. प्रेगनेंसी सपोर्ट बेल्ट

मैटरनिटी सपोर्ट बेल्ट पेट के बढ़ते भार को सहारा देती है और पीठ पर पड़ने वाले दबाव को कम करती है। दूसरी तिमाही से इसका उपयोग शुरू कर सकती हैं। डॉक्टर से सही साइज़ और पहनने का तरीका पूछें।

7. हल्दी वाला दूध

हल्दी में करक्यूमिन होता है जो प्राकृतिक सूजन-रोधी (anti-inflammatory) गुणों वाला है। रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर पिएं। यह मांसपेशियों की सूजन कम करने में सहायक है।

गर्भावस्था में पीठ दर्द से बचाव और सावधानियां

कुछ आसान आदतें अपनाकर दर्द को काफ़ी हद तक रोका जा सकता है:

सही मुद्रा (Posture) बनाए रखें

खड़े होते समय कंधे पीछे और सीधे रखें। बैठते समय पीठ को सहारा दें और पैर ज़मीन पर सपाट रखें। लंबे समय तक एक ही स्थिति में न रहें, हर 30-40 मिनट में स्थिति बदलें।

भारी सामान न उठाएं

ज़मीन से कुछ उठाना हो तो कमर से झुकने की बजाय घुटने मोड़कर बैठें। भारी वस्तुओं को उठाने से पीठ पर अचानक दबाव पड़ता है जो दर्द बढ़ा सकता है।

सही तरीके से सोएं

करवट लेकर सोएं, ख़ासकर बाईं करवट। दोनों घुटनों के बीच एक तकिया रखें और पेट के नीचे भी सहारे के लिए तकिया लगाएं। इससे रीढ़ की हड्डी को प्राकृतिक स्थिति में आराम मिलता है।

आरामदायक जूते पहनें

ऊंची एड़ी (हील्स) से बचें। सपाट और कुशन वाले जूते पहनें जो पैरों को सही सहारा दें। गलत जूते शरीर का संतुलन बिगाड़ते हैं और पीठ पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं।

संतुलित आहार और पानी

कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर आहार हड्डियों और मांसपेशियों को मज़बूत रखता है। पर्याप्त पानी पिएं ताकि मांसपेशियों में ऐंठन (क्रैम्प) न हो।

तनाव कम करें

तनाव मांसपेशियों में अकड़न बढ़ाता है। गहरी सांस लेना, ध्यान (मेडिटेशन), और हल्का प्रीनेटल योग तनाव कम करने में मदद करते हैं।

प्रेगनेंसी में कमर दर्द के बारे में मिथक और तथ्य

गर्भावस्था के दौरान कमर की समस्या को लेकर कई तरह के मिथक और गलतफहमियां प्रचलित हैं, जिनकी सच्चाई जानना जरूरी है।

  • मिथक: प्रेगनेंसी में कमर दर्द होना सामान्य नहीं है। तथ्य: प्रेगनेंसी में कमर दर्द होना आम बात है और ज्यादातर महिलाओं को इसका अनुभव होता है। यह शरीर में होने वाले बदलावों के कारण होता है।
  • मिथक: प्रेगनेंसी में पीठ दर्द का इलाज नहीं किया जा सकता है। तथ्य: प्रेगनेंसी में कमर दर्द का इलाज किया जा सकता है और इसके लिए कई उपाय और दवाएं उपलब्ध हैं, जो डॉक्टर की सलाह से ली जा सकती हैं।
  • मिथक: प्रेगनेंसी में कमर दर्द के कारण गर्भपात हो सकता है। तथ्य: आमतौर पर गर्भावस्था में कमर की तकलीफ़ के कारण गर्भपात नहीं होता है। लेकिन अगर दर्द बहुत ज्यादा हो या अन्य गंभीर लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

इन मिथकों और तथ्यों को जानकर आप प्रेगनेंसी में कमर दर्द को लेकर सही जानकारी रख सकती हैं और बेवजह की चिंता से बच सकती हैं।

प्रेगनेंसी में गंभीर कमर दर्द क्यों होता है और उसके संकेत

वैसे तो आप जान चुकी हैं कि पीठ में दर्द कब शुरू होता है, लेकिन यह भी जानना जरूरी है कि कभी-कभी यह बहुत गंभीर हो सकता है। आइए समझते हैं कि इसके गंभीर होने के संकेत क्या हैं:

  1. अगर आपको लगातार तेज़ दर्द हो रहा है, तो इसके कारण हर्निया या डिस्क का खिसकना हो सकता है।
  2. यदि आपके पैर में सूजन है और कमर में लगातार दर्द महसूस हो रहा है, तो यह नस के दबने के कारण हो सकता है।
  3. अगर आपके कमर दर्द के साथ-साथ वजाइना से खून का बहाव भी हो रहा है, तो यह एक गंभीर स्थिति है और आपको तुरंत चिकित्सा सलाह की ज़रूरत है।

निष्कर्ष

गर्भावस्था में पीठ और कमर का दर्द एक आम समस्या है, लेकिन सही जानकारी और समय पर उपाय अपनाकर इसे काफ़ी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। नियमित हल्का व्यायाम, सही मुद्रा, घरेलू उपाय, और पर्याप्त आराम इस दर्द से राहत दिलाने में बहुत मदद करते हैं।

सबसे ज़रूरी बात यह है कि अगर दर्द तेज़ हो, लगातार बना रहे, या इसके साथ बुखार, सुन्नपन, या पेशाब में समस्या हो तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें। हर गर्भावस्था अलग होती है, इसलिए कोई भी नया व्यायाम या उपाय शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।

References

  1. ACOG. “Back दर्द During Pregnancy.” American College of Obstetricians and Gynecologists. 2023.
  2. Katonis P, et al. “Pregnancy-related low back दर्द.” Hippokratia. 2011;15(3):205-210. PMID: 22435016.
  3. Sabino J, Grauer JN. “Pregnancy and low back दर्द.” Current Reviews in Musculoskeletal Medicine. 2008;1(2):137-141.
  4. WHO. “WHO Recommendations on Maternal and Newborn Care for a Positive Postnatal Experience.” 2022.
  5. Vleeming A, et al. “European guidelines for the diagnosis and उपचार of pelvic girdle दर्द.” European Spine Journal. 2008;17(6):794-819.
  6. FOGSI. “Good Clinical Practice Recommendations on Antenatal Care.” Federation of Obstetric and Gynaecological Societies of India. 2021.
T
Written by Teddyy Editorial Team
Maternal and Baby Care Content Specialist at Teddyy Diapers | Backed by Nobel Hygiene Pvt Ltd (WHO & GMP Certified) with 25+ years of expertise in infant care and hygiene products. Our content is reviewed by parenting specialists.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रेगनेंसी में कमर दर्द कब शुरू होता है?

अधिकतर महिलाओं को प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही से कमर दर्द की शुरुआत होती है। यह गर्भ में बच्चे के बढ़ते वज़न और हार्मोनल बदलावों की वजह से होता है।

क्या प्रेगनेंसी में कमर दर्द सामान्य है?

हाँ, यह एक सामान्य गर्भावस्था का लक्षण है, खासकर जब शरीर डिलीवरी के लिए तैयार हो रहा होता है। हालांकि, असहनीय दर्द होने पर डॉक्टर से सलाह लें।

प्रेगनेंसी में कमर दर्द से राहत पाने के उपाय क्या हैं?

गर्म पानी की सिकाई, हल्की स्ट्रेचिंग, और साइड में सोने की स्थिति अपनाना मददगार हो सकता है। अधिक दर्द होने पर मेडिकल सलाह लेना जरूरी है।

क्या कमर दर्द प्रेगनेंसी का शुरुआती लक्षण हो सकता है?

कभी-कभी, यह शुरुआती लक्षणों में से एक हो सकता है, खासकर जब शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। लेकिन यह सभी महिलाओं में नहीं होता।

प्रेगनेंसी में कौन-सी पोजीशन में सोना कमर दर्द में राहत देता है?

बाईं करवट पर सोना सबसे अच्छा माना जाता है, इससे रक्त प्रवाह बेहतर होता है और कमर पर दबाव कम होता है। एक तकिया पैरों के बीच रखने से भी आराम मिलता है।